Sunday, October 12, 2014

नाम के अंकों से करें रोग का निदान



गोपाल राजू की सर्वाधिक चर्चित पुस्तक,

बच्चों के भाग्यशाली नामका सार-संक्षेप

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यदि समस्या है तो उसका कोई न कोई समाधान भी कहीं न कहीं अवश्य छिपा हुआ है। आवश्यकता है उस समाधान विशेष की तलाश करने की तदनुसार विशुद्ध गणनाओं के द्वारा समस्या विशेष के निदान की। परन्तु यह उतनी सरल नहीं है जितनी कि व्यवसायी वर्ग द्वारा सर्वसाधारण को अज्ञानता और बहुतायत में परोसी जा रही है। देखा जाए तो उचित समाधान के पीछे छिपा है ज्योतिष, अंक, सामुद्रिक आदि अनेको गुह्य विधाओं का विस्तृत ज्ञान, धैर्यपूर्वक तथा निःस्वार्थ श्रम साध्य और बौद्धिक गणनाएं।

     अंक शास्त्र में नौ तक के अंकों में अनेक बीमारियां देने का नैसर्गिक दोष समाहित है, तदनुसार व्यक्ति शारीरिक कष्ट भी भोग सकता है।

     किसी माह की 1, 10, 19 तथा 28वीं तारीख में जन्में व्यक्ति हदयरोग अथवा उच्च रक्त चाप आदि बीमारियों से पीड़ित हो सकते हैं।

माह की 2, 11 तथा 29वीं तिथियों में जन्म लेने से पेट संबंधी अनेक रोग संभावित होते हैं।

3, 12, 21 तथा 30वीं तारीख में जन्में व्यक्ति स्नायु तंत्र से संबंधित रोगी हो सकते हैं।

माह की 4, 13, 22 तथा 21वीं तिथि में जन्में व्यक्ति मानसिक रोग तथा रक्त की कमी के शिकार हो सकते हैं।

 किसी माह की 5, 14 तथा 23वीं तिथि में जन्मे व्यक्ति स्नायु तंत्र अथवा पक्षाघात से पीड़ित हो सकते हैं।

माह की 6, 15 तथा 24वीं तारीख जन्म लेने वाले नाक, गला अथवा फेफड़े संबंधी रोगी हो सकते हैं।

7, 16 तथा 25वीं तारीख में जन्म लेने से त्वचा के अनेक रोग संभावित रहते हैं।

माह की 8, 17 तथा 26वीं तारीख में जन्म लेने से व्यक्ति लीवर, आंत अथवा अन्य पेट का रोगी हो सकता है।

माह की 9, 18 तथा 27वीं तारीख में जन्म लेने वाला खसरे अथवा अन्य त्वचा के रोगों से पीड़ित हो सकता है।

आप देखें कि उक्त तिथियों में आपका जन्म कहॉ हुआ है। यह आवश्यक नहीं कि आप रोगी हों ही, क्योंकि रोगी होना अथवा न होना अन्य बातों की तरह ज्योतिष के अन्य घटकों पर भी निर्भर करता है।

दुर्भाग्य से यदि आप रोगी हैं तो एक संभावना यह भी हो सकती है कि आपका नाम आपके जन्मांकों के अनुरुप नहीं है, तदनुसार वह आपको रोगी बना रहा है। सामान्यतः शुभ के लिए नाम परिवर्तन के समय रोग, स्थान आदि जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता है। बच्चों अथवा अपने नाम चयन से पूर्व सदैव प्रयास करें कि यह पहलू भी आपके गणनाओं में पहले से ही आ जाए।

उदाहरण के लिए माना आप 4 नवंबर को पैदा हुए हैं और मानसिक संत्रास से पीड़ित हैं, तो आपके लिए यही उत्तम रहेगा कि पहले वह नाम तलाशें जो मानसिक संत्रास से आपको मुक्ति दिला सके। 4 के मित्र हैं - 4, 5, 6, 7 तथा 8 अंक। इस अंक के प्रतिनिधि ग्रह हैं राहु और सूर्य। सर्वप्रथम प्रयास करें कि इन पांच मित्र अंकों में से ही कोई एक वह अंक आपका नामांक बने जिससे संबंधित ग्रह भी जन्म कुण्डली में बलवान हो और बीमारी देने वाले अंक तथा संबंधित ग्रह से परस्पर छठे, आठवें अथवा दूसरे, बारहवें भाव में स्थित न हो । आपका यह चुनाव सर्वोत्तम सिद्ध होगा। दूसरे, तीसरे अथवा अन्य क्रम में वह अंक तथा ग्रह चुनें जो अंक 4 के मित्र हों।

15 फरवरी 1975 में जन्मी एक लड़की के उदाहरण से नाम चयन करना अधिक सरल हो जाएगा। इस लड़की का नाम चयन करते समय ज्योतिष का भी मैंने पूरी तरीके से सहारा लिया गया था।

 लड़की के प्रचलित नाम VARIJA के नामांक से प्रारंभ करते हैं।

V 6     V 6

A 1     A 1

R 2    R 2

I  1    S 3

J 1     H 5

A 1     A 1

    -------   -------

  3       9



   नामांक = 12 = 1+2 = 3



  बदला नामांक, VARSHA = 18 = 1+8 = 9

-  वारिजा के मूलांक और भाग्यांक 6 और 3 परस्पर शत्रु हैं।

-  6 अंकशास्त्र में सांस की नली में दोष दर्शाता है तदनुसार नाक, गला, फेफड़े आदि        के रोग देता है।

-  जन्म पत्रिका ध्यान से देखें तो स्पष्ट होता है कि मूलांक तथा नामांक के अंक क्रमशः 6 और 3 पंचधादि मैत्री में भी शुभ नहीं हैं।

-  पत्री में तृतीय भावगत शनि, तृतीय भाव का स्वामी ग्रह बुध अपने से अष्टम में होने के कारण इस भाव को दोषपूर्ण बना रहा है। बुध केतु की दृष्टि से पीड़ित है। तृतीय भाव पर मंगल तथा राहु पाप ग्रहों से दृष्ट है।

-  ज्योतिष में बुध स्नायु तंत्र पर नियंत्रण रखता है। वारिजा की पत्री में श्वसन तथा स्नायु तंत्र के रोग को छोड़कर अन्य कहीं कोई कमी नहीं है। उन्हें जीवन के सब सुख और ऐश्वर्य भोगने को मिले हैं। दुर्भाग्य से किसी का भी ध्यान निदान के समय उनके नाम पर नहीं गया। खोजी प्रवृत्ति के कारण अन्य निदान के पहलुओं के साथ-साथ नाम पर मैंने विशेष ध्यान दिया।

-  वारिजा के लिए 5, 8, 9 अंक सम हैं।

-  इनमें मंगल का अंक 9 मुझे विशेष प्रभावशाली लगा। ज्योतिषीय आंकलन से भी पत्री में मंगल बलवान है।

-  मंगल लग्न का स्वामी है तथा नवम भाव में अपनी मित्र राशि में स्थित है।

-  मंगल मूलांक तथा भाग्यांक के प्रतिनिधि ग्रहों का मित्र है।

-  नवमांश में मंगल अपनी स्वयं की राशि वृश्चिक में स्थित है।

-  मंगल शुक्र ग्रह के नक्षत्र में है, जो कि इसकी शुभ राशि है। इसलिए भी मंगल अधिक बलवान हो गया है।

पाठक जानकर और भी प्रेरित होंगे कि वारिजा के नए नाम वर्षा परिवर्तन से उन्हें बहुत राहत मिली। कहते हैं, कि भाग्य अच्छा हो तो निदान भी उपयुक्त मिल जाते हैं। ठीक ऐसा ही वारिजा के साथ हुआ। आज वह सुखी एवं स्वस्थ जीवन बिता रही हैं ।




गोपाल राजू (वैज्ञानिक)



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